Skip to main content

Posts

Featured

कुछ अनकहे जज्बात

Though I always remain inactive on my this account because posting same blogs everywhere sounds horrible to me. And that's why I post only those stuffs here which are somehow very close to my heart. So here it is...... कहते है की वक़्त को वक़्त दो सब ठीक हो जायेगा लेकिन कितना वक़्त? कोई ये क्यों नहीं बताता?कितने दिन? कितने महीने?कितने साल? क्या सब कुछ गलत सब कुछ सही होने के लिए ही होता है?क्या टूटते तारे सच में हमारी ख्वाहिशें पूरी कर सकते है?पता नहींl कभी कभी होता है ना की शब्द ही नहीं मिलते मिलती है तो बस खामोशी, एक ऐसी खामोशी जो बार-बार चीख-चीख कर जैसे कुछ कहना चाह रही हो और ना जाने कितने ही अंगिनत सवाल कर रही हो जिसका जबाब मुझे पता ही नहीं है  कभी मेरे अंदर एक अजीब सन्नाटा सा छा जाता है l एक ऐसा सन्नाटा जो अंदर ही अंदर मुझे खाये जा रहा है और मैं चाह कर भी कुछ नहीं कर पा रही हूंl ऐसा नहीं है की मैंने इस सन्नाटे से बाहर निकलने की कोशिश नहीं करी है मैंने इस सन्नाटे को खुद से दूर, बहुत दूर करने की कोशिश की है लेकिन ये सन्नाटा जैसे मुझे रम सा गया हो और मैं चाह कर भी कुछ नहीं कर सकती l ...

Latest Posts

Intro (A series of bad events of 2022)

Trust

My covid experience